दो कदम हम चाले तो ऐतराज ना करो
हमसे है यह सफर हमे नाराज ना करो
कश्ती को किनारे कम नही
किनारोसे कश्ती है कश्तीसे किनारे नही
ऐसे तो तुम अंजाम न करो
राहीको मिल ही जाती है मंजिले
हर चौराहेको मंजिल बनाते चलो
हर मंजिल से बने सफर, हर सफर से जिंदगी
मंजिल ही जिंदगी है ऐसे तो तुम आगाज ना करो
हमसे है यह सफर हमे नाराज ना करो
कश्ती को किनारे कम नही
किनारोसे कश्ती है कश्तीसे किनारे नही
ऐसे तो तुम अंजाम न करो
राहीको मिल ही जाती है मंजिले
हर चौराहेको मंजिल बनाते चलो
हर मंजिल से बने सफर, हर सफर से जिंदगी
मंजिल ही जिंदगी है ऐसे तो तुम आगाज ना करो
I can only read Hindi in splutter and not understand it. There seems to be rhyme in this but I am not able to understand its meaning.
ReplyDeleteHmm.... koshish achhi hai.... especially the last 2 lines....
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